अविनाश लॉ ऑफिसेज़ के क्रिमिनल वकील लखनऊ में एफआईआर दर्ज होने से लेकर ज़मानत, ट्रायल और अपील तक हर चरण पर मुवक्किलों का बचाव करते हैं।

हमारी आपराधिक कानून सेवाएं
क्रिमिनल वकील लखनऊ के रूप में हम इन मामलों में सहायता करते हैं:
- ज़मानत और अग्रिम ज़मानत (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 482)
- एफआईआर या आपराधिक कार्यवाही रद्द कराने की याचिका
- सत्र न्यायालय और मजिस्ट्रेट के समक्ष ट्रायल में बचाव
- दोषसिद्धि के विरुद्ध अपील और पुनरीक्षण
- धोखाधड़ी, साइबर अपराध और आर्थिक अपराधों (व्हाइट-कॉलर) में बचाव
- पीड़ित पक्ष की ओर से अभियोजन में सहायता
नए आपराधिक कानून
1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अधिनियम का स्थान ले लिया है। इन कानूनों का पूरा पाठ इंडिया कोड पर उपलब्ध है। प्रक्रिया में कई बदलाव हुए हैं, इसलिए नए कानूनों से परिचित क्रिमिनल वकील लखनऊ से सलाह लेना ज़रूरी है।
गिरफ्तारी होने पर आपके अधिकार
गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के आधार जानने, अपनी पसंद के वकील से सलाह लेने और 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने का अधिकार है। किसी को अपने विरुद्ध गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, और पुलिस अधिकारी के सामने दिया गया इकबालिया बयान सामान्यतः सबूत के रूप में मान्य नहीं होता। जो व्यक्ति वकील का खर्च नहीं उठा सकता, उसे निःशुल्क कानूनी सहायता का अधिकार है।
पहले 24 घंटों में क्या करें
शांत रहें, पुलिस से बहस न करें, और कोई भी बयान बिना पढ़े और समझे हस्ताक्षर न करें। एफआईआर की प्रति मांगें, परिवार को सूचित करें और तुरंत क्रिमिनल वकील लखनऊ से संपर्क करें। गिरफ्तारी की आशंका हो तो अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी दी जा सकती है, और गिरफ्तारी हो चुकी हो तो जल्द से जल्द नियमित ज़मानत की अर्ज़ी दी जानी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ज़मानत और अग्रिम ज़मानत में क्या अंतर है?
ज़मानत गिरफ्तारी के बाद मांगी जाती है, जबकि अग्रिम ज़मानत गैर-ज़मानती अपराध में गिरफ्तारी से पहले मांगी जाती है।
क्या आपराधिक मामले में समझौता हो सकता है?
कुछ अपराध शमनीय (कंपाउंडेबल) होते हैं, जिनमें पक्षकार समझौता कर सकते हैं। अन्य मामलों में उच्च न्यायालय सीमित परिस्थितियों में कार्यवाही रद्द कर सकता है। इस पर क्रिमिनल वकील लखनऊ से सलाह लें।
मामले की स्थिति कहाँ देखें?
ज़िला अदालतों के मामलों की स्थिति ई-कोर्ट्स पर और उच्च न्यायालय के मामलों की जानकारी इलाहाबाद उच्च न्यायालय की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।
संपर्क करें
गिरफ्तारी जैसे आपात मामलों में सीधे +91 95547 55559 पर कॉल करें, अन्यथा परामर्श बुक करें या हमसे संपर्क करें। अंग्रेज़ी में जानकारी के लिए हमारा Criminal Law पृष्ठ देखें।
यह पृष्ठ केवल सामान्य जानकारी के लिए है और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार यह कोई विज्ञापन या आग्रह नहीं है।
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