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लखनऊ में आपसी सहमति से तलाक: प्रक्रिया, दस्तावेज़ और 6 महीने की छूट

By Avinash Singh13 अक्टूबर 20262 min read

जब पति और पत्नी दोनों मान लेते हैं कि विवाह आगे नहीं चल सकता, तो आपसी सहमति से तलाक विवाह समाप्त करने का सबसे तेज़ और कम कष्टदायक तरीका है। इस लेख में कानून, लखनऊ के परिवार न्यायालय में चरणबद्ध प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज़, लगने वाला समय और छह महीने की प्रतीक्षा अवधि की छूट — फरवरी 2026 के सर्वोच्च न्यायालय निर्णय सहित — समझाई गई है।

आपसी सहमति से तलाक – अविनाश लॉ ऑफिसेज़, लखनऊ

आपसी सहमति से तलाक का कानून

हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख दंपतियों के लिए आपसी सहमति से तलाक हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13B के तहत होता है। विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत विवाहित दंपति धारा 28 के तहत, और ईसाई दंपति तलाक अधिनियम, 1869 की धारा 10A के तहत आवेदन कर सकते हैं, जिसमें अलग रहने की अवधि अधिक है। मुस्लिम दंपति पर्सनल लॉ के तहत मुबारत द्वारा आपसी समझौते से विवाह समाप्त कर सकते हैं। इन कानूनों का पाठ इंडिया कोड पर उपलब्ध है।

धारा 13B के तहत तीन शर्तें पूरी होनी चाहिए:

  • पति-पत्नी कम से कम एक वर्ष से अलग रह रहे हों;
  • वे साथ नहीं रह पा रहे हों; और
  • दोनों ने सहमति से तय किया हो कि विवाह समाप्त होना चाहिए।

धारा 14 के अनुसार सामान्यतः विवाह के एक वर्ष के भीतर तलाक की कोई याचिका नहीं दी जा सकती, सिवाय असाधारण कठिनाई के, जिसमें अदालत अनुमति दे सकती है।

लखनऊ में प्रक्रिया: 5 चरण

  1. समझौता: स्थायी गुज़ारा भत्ता, स्त्रीधन की वापसी, बच्चों की कस्टडी और मुलाकात, तथा लंबित मुकदमों की वापसी पर लिखित सहमति।
  2. पहली अर्ज़ी (फर्स्ट मोशन): दोनों पक्ष परिवार न्यायालय में संयुक्त याचिका दायर करते हैं — सामान्यतः जहाँ विवाह हुआ, जहाँ दोनों अंतिम बार साथ रहे, या जहाँ पत्नी रहती है।
  3. बयान: दोनों पक्षों के बयान दर्ज होते हैं; अदालत परामर्श या मध्यस्थता के लिए भेज सकती है।
  4. प्रतीक्षा अवधि: दूसरी अर्ज़ी पहली अर्ज़ी के कम से कम छह महीने बाद और अधिकतम अठारह महीने के भीतर दी जाती है।
  5. दूसरी अर्ज़ी (सेकंड मोशन): दोनों पक्ष सहमति की पुष्टि करते हैं और संतुष्ट होने पर अदालत आपसी सहमति से तलाक की डिक्री पारित करती है।
आपसी सहमति से तलाक – लखनऊ परिवार न्यायालय की प्रक्रिया

क्या छह महीने की प्रतीक्षा माफ हो सकती है?

हाँ। अमरदीप सिंह बनाम हरवीन कौर (2017) में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि छह महीने की अवधि निर्देशात्मक है, अनिवार्य नहीं। परिवार न्यायालय इसे माफ कर सकता है यदि:

  • पहली अर्ज़ी से पहले ही एक वर्ष का अलगाव और छह महीने की अवधि बीत चुकी हो;
  • मध्यस्थता और सुलह के सभी प्रयास विफल हो चुके हों;
  • पक्षकारों ने गुज़ारा भत्ता और कस्टडी सहित सभी मुद्दे वास्तव में सुलझा लिए हों; और
  • प्रतीक्षा से केवल उनकी पीड़ा बढ़ेगी।

छूट का आवेदन पहली अर्ज़ी के एक सप्ताह बाद दिया जा सकता है। 2 फरवरी 2026 को मिशा सोमानी बनाम ऋतुराज सोमानी में सर्वोच्च न्यायालय ने छूट से इनकार करने वाले उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द किया, दोहराया कि यह अवधि निर्देशात्मक है, और संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत स्वयं आपसी सहमति से तलाक की डिक्री दी।

क्या सहमति वापस ली जा सकती है?

हाँ। डिक्री पारित होने तक सहमति बनी रहनी चाहिए। दूसरी अर्ज़ी से पहले कोई भी पक्ष सहमति वापस ले सकता है। इसीलिए आपसी सहमति से तलाक में शुरुआत में ही स्पष्ट, निष्पक्ष और पूर्ण समझौता बहुत ज़रूरी है।

आवश्यक दस्तावेज़

  • विवाह प्रमाणपत्र, या विवाह की तस्वीरें और निमंत्रण पत्र
  • दोनों पक्षों के पते और पहचान के प्रमाण
  • हाल की पासपोर्ट आकार की तस्वीरें
  • अलग रहने की अवधि का विवरण
  • गुज़ारा भत्ते से संबंधित आय और संपत्ति का विवरण
  • हस्ताक्षरित समझौते की शर्तें, कस्टडी व्यवस्था सहित

आपसी सहमति से तलाक की याचिका के साथ ये दस्तावेज़ पहली अर्ज़ी के समय ही लगाने चाहिए।

आपसी सहमति से तलाक में कितना समय लगता है?

छूट के बिना सामान्यतः पहली अर्ज़ी से लगभग छह से सात महीने लगते हैं। छूट मिलने पर डिक्री पहली अर्ज़ी के कुछ सप्ताह के भीतर भी हो सकती है। विदेश में रहने वाले पति या पत्नी के मामले में अदालतें उचित मामलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उपस्थिति की अनुमति देती रही हैं।

आपसी सहमति से तलाक – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या दोनों का अदालत में उपस्थित होना ज़रूरी है?

हाँ, सामान्यतः दोनों अर्ज़ियों में दोनों पक्षों को उपस्थित होना होता है ताकि अदालत सहमति की पुष्टि कर सके।

एक वर्ष से कम अलगाव हो तो क्या आवेदन कर सकते हैं?

नहीं। धारा 13B के तहत आपसी सहमति से तलाक के लिए एक वर्ष अलग रहना अनिवार्य शर्त है।

क्या निःशुल्क कानूनी सहायता मिल सकती है?

महिलाओं सहित पात्र व्यक्ति राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण से निःशुल्क सहायता ले सकते हैं।

लखनऊ में पारिवारिक वकील से बात करें

हमारे तलाक वकील लखनऊ समझौते का मसौदा तैयार करते हैं, संयुक्त याचिका दायर करते हैं, कानून के अनुसार प्रतीक्षा अवधि की छूट का आवेदन देते हैं और परिवार न्यायालय तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय में पेश होते हैं। गोपनीय परामर्श बुक करें। अंग्रेज़ी में पढ़ें: Mutual consent divorce guide।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह या आग्रह नहीं है। कृपया अपने तथ्यों पर विशेष सलाह लें।

Avinash Singh

Avinash Singh

Advocate, Supreme Court of India and High Court · Founder, Avinash Law Offices, Lucknow. The views expressed are general in nature and do not constitute legal advice.

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