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यूपी भूलेख पर खतौनी कैसे देखें: खसरा, गाटा संख्या और भू-नक्शा

By Avinash Singh13 अक्टूबर 20262 min read

यूपी भूलेख उत्तर प्रदेश सरकार का निःशुल्क ऑनलाइन भू-अभिलेख पोर्टल है। इस पर कोई भी व्यक्ति कुछ ही मिनटों में किसी भूखंड की खतौनी (अधिकार अभिलेख) देख सकता है, दर्ज मालिकों के नाम जांच सकता है और भूमि का क्षेत्रफल तथा श्रेणी पता कर सकता है। इस लेख में यूपी भूलेख का उपयोग करने का पूरा तरीका, अभिलेखों का अर्थ और उनकी कानूनी सीमाएं बताई गई हैं।

यूपी भूलेख – अविनाश लॉ ऑफिसेज़, लखनऊ

यूपी भूलेख क्या है?

यूपी भूलेख (upbhulekh.gov.in) राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश की आधिकारिक भू-अभिलेख वेबसाइट है। इस पर प्रदेश के हर गांव की खतौनी उपलब्ध है, जो तहसील स्तर के अभिलेखों से अपडेट होती है। अभिलेख देखना निःशुल्क है और इसके लिए पंजीकरण की ज़रूरत नहीं है।

हमेशा पता स्वयं टाइप करें और जांचें कि वह .gov.in पर समाप्त होता है। कई निजी वेबसाइटें यूपी भूलेख जैसी दिखती हैं और भुगतान या निजी जानकारी मांगती हैं, जबकि आधिकारिक पोर्टल केवल अभिलेख देखने के लिए ऐसा कुछ नहीं मांगता।

ज़रूरी शब्द

  • खतौनी: अधिकार अभिलेख, जिसमें खातेदारों के नाम, उनके हिस्से, खाते में शामिल गाटा, क्षेत्रफल और भूमि की श्रेणी दर्ज होती है।
  • खाता संख्या: वह खाता जिसके अंतर्गत एक या अधिक मालिक गांव में भूमि रखते हैं।
  • खसरा या गाटा संख्या: गांव के नक्शे में किसी भूखंड की विशिष्ट संख्या।
  • भू-नक्शा: भूखंडों की सीमाएं दिखाने वाला डिजिटल नक्शा, जो upbhunaksha.gov.in पर उपलब्ध है।

यूपी भूलेख पर खतौनी देखने के 7 चरण

  1. upbhulekh.gov.in खोलें।
  2. “खतौनी (अधिकार अभिलेख) की नकल देखें” विकल्प पर क्लिक करें। नवीनतम प्रविष्टियों के लिए, जहाँ उपलब्ध हो, रियल टाइम खतौनी विकल्प चुनें।
  3. स्क्रीन पर दिखाया गया कैप्चा कोड भरें।
  4. जनपद, फिर तहसील और फिर ग्राम चुनें।
  5. खोज का तरीका चुनें: खसरा/गाटा संख्या (सबसे सटीक), खाता संख्या या खातेदार का नाम।
  6. खोजें पर क्लिक करें, सही अभिलेख चुनें और खतौनी देखें।
  7. प्रिंट विकल्प से अपने रिकॉर्ड के लिए प्रति सहेज लें।

यदि गांव सूची में न दिखे तो तहसील दोबारा जांचें। नाम से खोजने पर बहुत परिणाम आएं तो गाटा संख्या से खोजें।

यूपी भूलेख – खतौनी और खसरा की जांच

खतौनी कैसे पढ़ें

  • नाम और हिस्सा: विक्रेता का नाम खातेदार के रूप में और उसका दावा किया गया हिस्सा दर्ज होना चाहिए।
  • गाटा संख्या और क्षेत्रफल: ये बैनामे और ज़मीन पर दिखाए गए भूखंड से मेल खाने चाहिए।
  • भूमि की श्रेणी: कृषि, आबादी या अन्य। कृषि भूमि पर निर्माण के लिए सामान्यतः उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 80 के तहत अकृषिक घोषणा की आवश्यकता होती है।
  • टिप्पणी कॉलम: बंधक, ऋण, अदालती आदेश या लंबित दाखिल-खारिज की प्रविष्टियां।

क्या यूपी भूलेख की प्रति कानूनी सबूत है?

नहीं। यूपी भूलेख से देखी या प्रिंट की गई खतौनी केवल जानकारी और प्रारंभिक जांच के लिए है। बैंक, उप-निबंधक कार्यालय और अदालतें प्रमाणित प्रति मांगती हैं, जो तहसील से (और कई ज़िलों में ई-डिस्ट्रिक्ट या जन सेवा केंद्र के माध्यम से) मामूली शुल्क पर मिलती है। राजस्व प्रविष्टियां स्वामित्व का अनुमानित प्रमाण हैं, अंतिम नहीं — स्वामित्व अंततः पंजीकृत दस्तावेज़ों की श्रृंखला पर निर्भर करता है।

खरीदने से पहले और क्या जांचें

  • आईजीआरएस यूपी पोर्टल पर संपत्ति से जुड़े पंजीकृत दस्तावेज़ खोजें या भार प्रमाणपत्र लें।
  • कम से कम पिछले 30 वर्षों की स्वामित्व श्रृंखला देखें।
  • ई-कोर्ट्स और राजस्व न्यायालयों में लंबित मुकदमे जांचें।
  • नई परियोजना में यूपी रेरा पंजीकरण देखें।

खरीद के बाद दाखिल-खारिज

पंजीकृत बैनामे के बाद खरीदार को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 34 के तहत तहसीलदार के यहाँ दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) का आवेदन करना होता है। आदेश होने के बाद नया नाम यूपी भूलेख पर दिखने लगता है। खतौनी में कोई त्रुटि हो, तो संहिता की धारा 38 के तहत सुधार का आवेदन किया जा सकता है।

यूपी भूलेख – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी भूलेख: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यूपी भूलेख का उपयोग निःशुल्क है?

हाँ। खतौनी देखना और प्रिंट करना निःशुल्क है; केवल प्रमाणित प्रति पर शुल्क लगता है।

ज़मीन खरीदने के बाद मेरा नाम यूपी भूलेख पर क्यों नहीं दिख रहा?

सामान्यतः इसलिए कि दाखिल-खारिज का आवेदन या आदेश अभी नहीं हुआ है। तहसील में स्थिति जांचें और आवेदन पर कार्यवाही आगे बढ़ाएं।

क्या नाम से खोज सकते हैं?

हाँ, पर नाम हिंदी में लिखना होता है और सामान्य नामों के कई परिणाम आते हैं। गाटा या खाता संख्या से खोज अधिक भरोसेमंद है।

सहायता चाहिए?

हमारे प्रॉपर्टी वकील लखनऊ खरीद से पहले खतौनी और स्वामित्व दस्तावेज़ों की जांच करते हैं तथा दाखिल-खारिज, सुधार और ज़मीन विवादों में सहायता करते हैं। परामर्श बुक करें या हमसे संपर्क करें। अंग्रेज़ी में पढ़ें: UP Bhulekh guide।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है और कानूनी सलाह या आग्रह नहीं है। पोर्टल की सुविधाएं और प्रक्रियाएं समय-समय पर बदलती रहती हैं; कृपया आधिकारिक वेबसाइट पर पुष्टि करें।

Avinash Singh

Avinash Singh

Advocate, Supreme Court of India and High Court · Founder, Avinash Law Offices, Lucknow. The views expressed are general in nature and do not constitute legal advice.

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